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पटना और मुर्शिदाबाद के कंपनी चित्रों में व्यवसाय, व्यापार और दैनिक जीवन का चित्रण

Issue Abstract

Abstract

अठारहवीं और उन्नीसवीं शताब्दी का संक्रमणकाल भारतीय उपमहाद्वीप के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक निर्णायक मोड़ का प्रतिनिधित्व करता है। मुग़ल सत्ता के क्षय और ईस्ट इंडिया कंपनी के वाणिज्यिक-राजनीतिक विस्तार के साथ भारतीय समाज की अर्थव्यवस्था, व्यवसायिक संरचनाएँ और दैनिक जीवन की पद्धतियाँ तीव्र परिवर्तन के दौर से गुज़रीं। इसी ऐतिहासिक संदर्भ में विकसित हुई कंपनी चित्रकला केवल एक औपनिवेशिक कलात्मक शैली न रहकर, समकालीन भारतीय समाज की आर्थिक गतिविधियों और जीवन-अनुभवों का महत्त्वपूर्ण दृश्य अभिलेख बन गई।

यह शोध-पत्र पटना और मुर्शिदाबाद के कंपनी चित्रों में व्यवसाय, व्यापार और दैनिक जीवन के चित्रण का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। अध्ययन का उद्देश्य यह विश्लेषण करना है कि किस प्रकार पटना की कंपनी चित्रशैली में स्थानीय श्रम, कारीगर समुदाय, छोटे स्तर के व्यापार और साधारण जनजीवन को प्रत्यक्ष एवं वस्तुनिष्ठ रूप में चित्रित किया गया, जबकि मुर्शिदाबाद की कंपनी चित्रकला में दरबारी संरक्षण, रेशमी वस्त्र व्यापार, अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक नेटवर्क और अभिजात्य आर्थिक संरचना को प्रमुखता प्राप्त हुई। दोनों केंद्रों के चित्रों में विषय-वस्तु, शैली, तकनीक और प्रतीकात्मक संकेतों के माध्यम से तत्कालीन सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं की भिन्न अभिव्यक्तियाँ स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होती हैं।

यह अध्ययन गुणात्मक शोध-पद्धति पर आधारित है, जिसमें दृश्य-विश्लेषण, आइकनोग्राफ़िक अध्ययन और ऐतिहासिक संदर्भों के समन्वय द्वारा चयनित चित्रकृतियों की विवेचना की गई है। तुलनात्मक दृष्टि से यह शोध स्थापित करता है कि कंपनी चित्रकला औपनिवेशिक भारत में व्यवसाय और व्यापार को केवल आर्थिक गतिविधियों के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन की संरचना और श्रम-संस्कृति के दृश्य प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करती है। इस प्रकार, पटना और मुर्शिदाबाद की कंपनी पेंटिंग्स भारतीय सामाजिक-आर्थिक इतिहास के अध्ययन हेतु एक महत्त्वपूर्ण और विश्वसनीय दृश्य स्रोत के रूप में उभरती हैं।

कुंजी शब्द: कंपनी चित्रकला, पटना कलम, मुर्शिदाबाद चित्रशैली, दैनिक जीवन का चित्रण, औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था, कारीगर और श्रम-संस्कृति, बाज़ार और वाणिज्यिक गतिविधियाँ, दृश्य इतिहास, औपनिवेशिक कला और समाज


Author Information
शिखा पाण्डेय शोधार्थी, ललित कला विभाग, तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद, उत्त्तर प्रदेश. डॉ. फरहा दीबा एसोसिएट प्रोफेसर ललित कला विभाग, तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद, उत्त्तर प्रदेश .
Issue No
5
Volume No
6
Issue Publish Date
05 May 2026
Issue Pages
1-22

Issue References

References

(क) पुस्तकें

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     कंपनी पेंटिंग्स: ब्रिटिश काल की भारतीय चित्रकला.
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     शासक, नगरवासी और बाज़ार: ब्रिटिश विस्तार के युग में उत्तर भारतीय समाज.
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     नई दिल्ली: ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस।
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     द एनार्की: ईस्ट इंडिया कंपनी का निरंतर और आक्रामक उदय.
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     एक ‘नवीन भारतीय कला’ का निर्माण: कलाकार, सौंदर्यशास्त्र और राष्ट्रवाद (1850–1920).
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     भारत में पुस्तक-कला की परंपरा.
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     औपनिवेशिक भारत में कला और राष्ट्रवाद (1850–1922): पाश्चात्य उन्मुखताएँ.
     कैम्ब्रिज: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस।
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     विश्व अर्थव्यवस्था में भारत: प्राचीन काल से वर्तमान तक.
     कैम्ब्रिज: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस।

(ख) शोध-पत्र एवं आलेख

  1. चैटर्जी, पार्थ. (2008).
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  2. गुहा-ठाकुरता, तपती. (2004).
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     राज की विचारधाराएँ.
     कैम्ब्रिज: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस।
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  5. सिंह, कविता. (2001).
     “अठारहवीं शताब्दी में मुर्शिदाबाद और उसकी कलात्मक विरासत।”
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(ग) ऑनलाइन स्रोत

  1. मैप अकादमी. (तिथि अनुपलब्ध).
    कंपनी चित्रकला.
    उपलब्ध स्रोत: https://mapacademy.io
  2. सहपीडिया. (तिथि अनुपलब्ध).
    कंपनी स्कूल चित्रकला.
    उपलब्ध स्रोत: https://www.sahapedia.org
  3. द हेरिटेज लैब. (तिथि अनुपलब्ध).
    कंपनी स्कूल पेंटिंग्स: एक दृश्य अभिलेख.
    उपलब्ध स्रोत: https://www.theheritagelab.in

(घ) संग्रहालय एवं अभिलेखागार

  1. ब्रिटिश लाइब्रेरी, लंदन —
     भारत में निर्मित कंपनी चित्रों का संग्रह।
  2. विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूज़ियम, लंदन —
     दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशियाई कंपनी चित्रकला संग्रह।
  3. इंडियन म्यूज़ियम, कोलकाता —
     मुर्शिदाबाद चित्रकला संग्रह।
  4. पटना म्यूज़ियम, पटना —
     पटना कलम चित्रकला संग्रह।
  5. राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली —
     कंपनी स्कूल चित्रकला संग्रह।